Ka Jingshai
RKMSHILLONG
Search:
Poesy - कवितायन

जानो इन्सान को...

एस्टरसन सौतुन   |   ISSUE III

उन लोगों को मैं
चुनौती देता हूं
जो कहते हैं कि
वे ईश्वर तक हमें पहुंचा सकते हैं.
अरे! पहले इंसानियत को तो पूजो फिर बात करो ईश्वर की।
इंसान ही इंसान को भूलने के लिए कहता है।
आओ मूल जड़ों की ओर
मूल क्या है ?
मूल वह धारा है
जो पृथ्वी को माता मानती है।
मूल वह है जो कहता है -
“नर सेवा नारायण सेवा”
Tip briew, tip blei
अर्थात इंसान को जानो
फिर ईश्वर को जानो।
क्यो हो गई है
इस अंधेरे में रहने की आदत?
ईश्वर है लेकिन उस तक पहुंचने के लिए,
किसी मंदिर मस्जिद गिरजाघर की जरूरत नहीं,
मानवता में ही ईश्वर उत्पन्न होता है लौट जाओ अपने मूल की ओर।


author
एस्टरसन सौतुन