गीता लिम्बू
पुस्तक- ‘नई सुबह’
लेखन – रीता सिंह ‘सर्जना’
प्रकाशक – बुक्सक्लिनिक पब्लिशिंग, बिलासपुर
प्रकाशन वर्ष – जुलाई 2022
मूल्य -190

पूर्वोत्तर भारतकी सशक्त लेखिका रीता सिंह ‘सर्जना’ की प्रथम कहानी संग्रह ‘नई सुबह’ के आवरण पृष्ठ में शीर्षक नाम के साथ सकारात्मक भाव जगाती ‘उम्मीदों का एक खूबसूरत एहसास-’ इस खूबसूरत पंक्तिको रखा गया है। उगता सूरज, हरी पत्तियों से पूर्ण वृक्ष, रास्ते में आगे बढ़ती गाड़ी, बच्चों से साथ आगे बढ़ती माँ ये सभी नई उम्मीद लेकर प्रगति की राह पर चल रहे हैं और शीर्षक नाम का सार्थक करता हुआ आवरण है।
माँ वीणापाणि की वंदना और समर्पण से अंतस पृष्ठों की शुरूवात हुई है। डाॅ भगवान स्वरूप चैतन्य की भूमिका तथा प्रबुद्ध जनों क शुभकामनाऔं में ही कहानियों का सार्थक विश्लेषण हुआ है।
कुल सोलह कहानियों में से पहली कहानी है ‘तोहफा’। ये इम्पोर्टेड हैं, एन आर आई दामाद है, कहकर फूले नहीं समानेवाले कुछ लोग हमारे समाज में हैं। जिनकी दृष्टि से देखा जाय तो अपने देशकी हर चीज विदेशी चीजों की तुलना में तुच्छ है , और तो और इंसान भी। ऐसी ही मानसिकता रखने वाला किरदार को लेकर कहानी गढ़ी गयी है।
युग के साथ बदलती सामाजिक पारिवारिक तथा जीवनधारण की व्यवस्थाओं के साथ समझौता करते इंसान की कहानी है। आजकाल बहू-बेटे, पोते-पोतियों से भरापूरा, चहलपहल वाला संयुक्त परिवार कम ही देखा जाता। बेटे के साथ-साथ नौकरी वाली बहू को घर से बाहर रहना पड़ता है, जिसके कारण घरके बूजूर्ग एकाकी जीवन बिताते हैं। इस एकाकीपन में समय मानों गुजरता ही नहीं ठहर जाता है। ऐसे में पति-पत्नी एक दूसरे की भावनाओं और चाहतों को सम्झे तो जीवन सुखद बनता है। इसी दिशा को निर्देश करती ‘सुलह’ एक मीठी सी सुखांत कहानी है।
‘ममतालय’ में मजहबी संघर्ष और मानव प्रेम दो विपरीत दिशाओं को दर्शाया गया है। मजहबी संघर्ष का परिणाम पतन ही है और मानव प्रेम का ठिकाना है ममतालय। इसीसे मिलती जुलती कहानी है ‘अलंकार’। ‘अलंकार’ में मानव प्रेम को सर्वश्रेष्ठ अलंकार घोषित किया गया है। मानवीय अनुभूतियों तथा प्रेम की सुंदर अभिव्यक्ति है ‘आशीर्वाद’।
बाहरी दुनिया से बेखबर रहकर केवल उदर पूर्ति के लिए काम करने वाले सोरेन जैसे लोगों को शिक्षा और सुधार की आवश्यकता है यही ‘सोरेन’ कहानी का निहित उद्देश्य है।
‘नई सुबह’ शीर्षक कहानी है जो नशा उन्मूलन की और दिशा निर्देश करती है।
‘मंगरू का सपना’ एक ऐसा सपना है जिसे संसार भर के माता-पिता अपनी संतान के सुखद भविष्यत को लेकर अपनी हैसियत के अनुसार देखते हैं। लेकिन कभी कभी संतान के कारण ही सपना टूटकर बिखर जाता है। गरीब कमजोर लोगों को दबानेवाला, ठगने वाला स्वार्थी वर्ग की हृदय हीनता का एक स्पष्ट चित्र भी कहानी में उकेरा गया है। ‘अभिलाषा’ कहानी भी इसी विषय वस्तु को केंद्र में रखकर बुनी गई है।
संविधान में सभी अधिकार प्राप्त होने के बावजूद समाज द्वारा उपेक्षित, माता पिता तथा अपनों के स्नेह से वंचित किन्नरों की व्यथा कथा है ‘क्या मेरा कुसूर है?’ बर्बादी , खूनखराबी, धोखा, पिछड़ेपन, आतंकीउपद्रवों को झेलता एक त्रासदपूर्ण अंचल की झांकी देखी जाती है कहानी ‘दंगा’ में। उजड़ी बस्ती को देखकर मंगल का दिल कराह उठता है लेकिन वह फिर नयी झोपड़ी खड़ी करने का उद्यम लेकर अपनी धुन में बाँस छिलने लगता है। कहानीकार ने यहाँ जीवन और जिजीविषा का सार्थक बिंब खींचा है।
‘थैला’ विपरीत परिस्थिति से संघर्ष करती एक सशक्त महिला मरमी बा का थैला है। ’. . . जानती हो मेरे इस थेला में मेरे परिवार की खुशियाँ समाई हुई है’ इसी संवाद में कहानी का निचोड़ है। ’ वो ‘थैला’ जो आजीविका का साधन ढोता है वो यहाँ आजीविका तथा जीवन संघर्ष का प्रतीक बना है।
‘सबिया’, ’अलविदा’, ‘पाषाण हृदय’ अलग अलग तरीके से प्रताड़ित स्त्रियों की व्यथा कथाएं हैं।
‘रिश्ता’ कहानी का पहला भाग समाज को दीमक की तरह चाट रही जात बिरादरी और दहेज प्रथा पर कठोर प्रहार करता है। अंत में
वात्सल्य कहानीमें वह करूणा है जो माँ और संतान के अटूट रिश्ते को बाँध कर रखती है।
वस्तुतः सारी कहानियाँ समाज की विसंगतियाँ, बिड़म्बनाएँ , त्रासदीयाँ आदि जटिल समस्याओं को लेकर कहानियाँ गढ़ी गई है जो सत्य के धरातल के ही उपज हैं और उसी धरातल के किरदारों के माध्यम से प्रस्तुत की गई है
व्यक्ति मनोभावों को सहज संवादों तथा सरल भाषा में सम्प्रेषित किया गया है। इसी कारण ये कहानियाँ प्रत्येक वर्ग के पाठक आत्मसात कर सकता है। घटनाओं की धाराप्रवाह गति पाठक को अंत तक कहानियों के साथ ले चलती हैं। जीवन के यथार्थ को उद्घाटित करती है ।
मैं आशा करती हूं, भविष्यत में लेखिका इस सुंदर सृजनों से भी अधिक सुंदर सृजनाएँ पाठकों को उपहारमें देंगी
मैं लेखिका को इस अनुपम कृति के लिए शुभकामनाएँ एवं साधुवाद देती हूं आशा करती हूं कि भविष्य में आप अपनी लेखनी द्वारा साहित्य संसार को समृद्ध करेंगी
गीता लिम्बू, शिलांग की प्रतिष्ठित लेखिका