(पुस्तक समीक्षा)

पुस्तक- मिथक और लोककथा गारो पहाड़ियों से

लेखन- श्रीमती सी. टी. संगमा

अनुवाद- डॉ अनीता पंडा

प्रकाशक- सन्मति पब्लीशर्स ऐंड डिट्रीब्यूटर्स, हापुड़ (उ.प्र.)

मेघालय में अवस्थित गारो पहाड़ियाँ और उनसे उपजे मिथक आज भी जुबान पर थिरकते हुए अनायास ही अपनी ओर खींचते हैं। इसको शिद्दत से अनुभूत किया अवकाश प्राप्त राज्य प्रशासनिक अधिकारी, मेघालय सरकार और ख्यातिलब्ध लेखिका श्रीमती सी.टी. संगमा ने। तत्पश्चात शिलॉंग (शिवलिंग) में तीन दशकों से शिक्षण/प्रशिक्षण, शोध और लेखन में अग्रणी रहीं डॉ अनीता पंडा ने श्री मती संगमा द्वारा लिखित “Myriad Colours Of North East – 1,2,3” को आधार बनाकर चिंतन के ताने-बाने से वितान बुना। डॉ अनीता पंडा जी ने राजभाषा हिंदी में न केवल अनुवाद किया बल्कि स्वाध्ययन, अवलोकन एवं जनश्रुतियों द्वारा प्रत्युत्पन्न निष्कर्ष से कथा-विन्यास विकसित किया।

इस पुस्तक में पौराणिक एवं मिथक, शौर्य कथाएँ, लोक कथाएँ, प्रेम कथाएँ तथा रहस्यमयी कथाओं सहित 5 अध्याय निहित हैं। लेखिका ने सदैव अनुवाद की मूल संचेतना को सुरक्षित एवं संरक्षित रखा है। प्रो. दिनेश कुमार चौबे ने अनुवाद के बारे में बहुत स्पष्ट मत रखते हुए कहा है कि अनुवाद का मतलब परकाया में प्रवेश है। दूसरे शब्दों में ‘एकात्म’ हो जाना अनुवाद का आवश्यक गुण एवं आवश्यकता है। अनुवादक लेखिका ने इसके प्रति सजगता का परिचय दिया है। यद्यपि भाषा के रूप में हिंदी व्यवहृत है तथापि स्थानीय जीवन, संस्कृति, गाथा एवं मिथक के साथ तादात्म्य में कमी नहीं आने दी गई, जो अनुभवी लेखिका की कुशल लेखनी की पुष्टि हेतु पर्याप्त है।

मिथक क्या है? जानना महत्वपूर्ण है और आवश्यक भी विशेषतः इस पुस्तक के संदर्भ में। मिथक परम्परागत या अनुश्रुत कथा है जो किसी अतिमानवीय तथाकथित प्राणी या घटना से सम्बंध रखती है। विशेषतः इसका सम्बंध देवताओं, विश्व की उत्पत्ति तथा विश्वासों से है। यह एक ऐसा विश्वास है जो बिना तर्क के स्वीकार किया जाता है। प्रसाद जी की कामायनी के मूल्यांकन से हिंदी साहित्य में मिथक पर विचार का प्रारम्भ माना जाता है। दूसरे शब्दों में लेखन को एक मिथकीय प्रक्रिया के रूप में स्वीकार किया गया है। जैसा कि डॉ नगेन्द्र ने कहा था कि ‘……नये कवि वर्तमान के अतीतत्व और अतीत के वर्तमानता में विश्वास करते हैं’, डॉ अनीता पंडा ने अनुवाद करते समय मिथक की इस विशेषता को पूर्णतः सिद्ध करते हुए संरक्षित किया है।

बंदर, मकड़ा, सियार, जुगनू, हाथी, लंगूर, सूअर, कुत्ता, मुर्गी और मेंढक आदि जीव-जंतुओं और कुछ लड़के/लड़कियों के चरित्रों के माध्यम से सुदक्ष लेखिका/अनुवादिका ने लोककथा को नवजीवन और नूतन कलेवर प्रदान किया है। बंदर की नकलची प्रकृति और फलस्वरूप असफलता की ओर भी बारम्बार इंगित किया गया है। लोककथा किसी मानव-समूह की उस साझी अभियक्ति को कहते हैं जो लोककथाओं, कहावतों, चुटकुलों आदि अनेक रूपों में अभिव्यक्त होता है। इस पुस्तक में पैनी नजर और बेबाकीपन से इसका अनुपालन किया गया है। डॉ अनीता जी ने गारो पहाड़ियों की मूल संज्ञा को हिंदी शब्दार्थ के साथ सजाया है जिससे पाठक बिना भटकाव के सटीक एवं वांछित छवि बना सके। बाल्पक्रम की खूबसूरती, चमत्कार, किंवदंती, मिथकाधारित लोककथा पर लेखनीचलाते हुए अनुवादिका ने देखी और सुनी बातों में फर्क के प्रति पूर्ण सजगता का परिचय दिया है।

यह पुस्तक लेखिका श्रीमती संगमा और अनुवादिका श्रीमती पंडा के सान्द्रित शोध का सकारात्मक परिणाम है। पाठकों के चक्षु – पटल पर गारों पहाड़ियाँ जीवंत हो उठती हैं। संस्कृति, सोच और दिनचर्या सजीव हो जाती हैं। पुस्तक का आकर्षक आवरण और सुरुचिकर विषयवस्तु पाठक-हृदय को संतृप्त करते हैं और अतिरिक्त गहन शोध हेतु प्रेरित भी।

पुस्तक- मिथक और लोककथा गारो पहाड़ियों से

लेखन- श्रीमती सी. टी. संगमा

अनुवाद- डॉ अनीता पंडा

प्रकाशक- सन्मति पब्लीशर्स ऐंड डिट्रीब्यूटर्स, हापुड़ (उ.प्र.)

प्रकाशन वर्ष- 2020

पृष्ठ-114

मूल्य- रुपये 135/-

Shad Nongkrem In Smit

Skhemlang Hynñiewta is a Postgraduate Diploma holder from Centre for Cultural and
Creative Studies, North Eastern Hill University, Shillong. He is an apprentice of Riti Academy
and the collection of his artworks are in few prestigious institutions including the Raj Bhavan,Shillong. He is also an avid sculptor and
illustrator with extensive experience in both creative and commercial design artworks. The painting on the right is in the possession of Raj Bhavan, Shillong

सौतेला

डॉ अन्नपूर्णा बाजपेयी, ‘अंजू’, कानपुर
साहित्यकार, ब्लॉगर, समाज सेविका, योगा ट्रेनर।


“रे! कलुआ, जरा इधर तो आ! “खटिया पर बैठे हुक्का गुड़गुड़ करते हुए कलुआ के बापू ने जोर से पुकारा।
कलुआ खेल में मग्न था सुना नहीं।
“जरा जोर से बुलाइयो, खेल रहा है छोरा न सुनैगो!”अपने सिर के पल्लू को सँवारती हुई माई उधर ही आ बैठी।
“इतनी देर से पुकार रहा हूँ सुनता ही न है पाजी कहीं का!” झुंझलाते हुए बापू बोला।
“बालक ने दिनभर खेलते रहना अच्छा न है गोलू के बापू! इसको जरा कस के रखियो!”और घी गुड़ रोटी पर चुपड़ कर दूसरे पुत्र गोलू को खिलाने लगी।
उसने प्रेम से पुकारा, “कल्लू जरा सुन तो!”
“हाँ माई!” कल्लू लपकता हुआ आ पहुंचा। और ललचाई नजरों से घी गुड़ लगी रोटी खाते हुए छोटे भाई का मुँह ताकने लगा।
“सुन मैं तुझे पाठशाला भेजना चाहवे हूँ तू जावेगा न, जैसे गोलू जावे है!” माई बोली।
“हाँ माई!”कहते हुए वह खुशी से उछल पड़ा फिर कुछ सोचता हुआ बोला, “माई तू मन्ने सच्ची में पढ़ने भेजेगी।” “हाँ रे! छोरा!” तू काहे पूछे है माई बोली।
“बगल वाली चाची कह रही थी कि इसको कौन पढावेगा ये तो सौतेला है! इसकी माई अपने बालक ने पढावेगी और अफसर बनावेगी!” भोलेपन से बोला कल्लू।
“इसीलिए तो तुझे जरूर पढ़ाना चाहूँ हूँ, तू तो मेरा कान्हा है सौतेला नहीं, जैसे कान्हा जी की दो-दो माई थी वैसे ही तेरी भी दो दो माई।” मुस्कुराते हुए माई ने उसके गाल पर एक प्यार भरी चपत लगाई।
“तो माई तूने घी गुड़ की रोटी मन्ने क्यों न दी!“ भोलेपन में बोल गया कल्लू और उसके माँ बाप एक दूसरे का मुँह ताकने लगे।

The Iconic Cultural Archgate Unveiled

The new iconic Archgate to the State Central Library was officially unveiled to mark the onset of the Golden Jubilee Celebration of Meghalaya Statehood next year. Apart from accomplishing 49 years of statehood, Meghalaya on Thursday also received a monumental gift in the face of the iconic arch gate at the entrance to the State Central Library.
Arts and Culture Minister, AL Hek, inaugurated the arch gate, which has been built with a design that reflects the cultural heritage and symbolizes the tradition and rich culture of the state.
A L Hek informed that the structure will soon have an artistic mural on the wall adjacent to the gate. During the inauguration, a flex was put up to depict the intangible heritage of Meghalaya.
Meanwhile, Commissioner and Secretary of the Arts and Culture department, FR Kharkongor, said that the State Central Library is a centre of all artistic activities and in the run-up to the 50 years of statehood, the iconic gate has been conceived with an idea of reflecting the cultural legacy of the state.
Stating that people will also witness other components in the project, he added that an artistic mural will soon come up which will showcase various elements of the Khasi, Jaintia, and Garo tribes of the state.
“As this project nears completion, we hope that it will steadily emerge as one of the iconic areas in Shillong,” he added. He said that there are plans to revamp the interior parts of the central library in the future.

A Monument in Memory of Khasi Freedom Fighters

Megalithic Erection Ceremony in Progress

The Nongthliew village at the Dieng?ei plateau is the territory within the jurisdiction of the Nongkhlaw province and is one of the largest village in the area with thousands of households and tens of thousands inhabitants. One of the significant segments of the village known as Laitarted has spectacular landscape and topographical contours. The local durbar has granted permission to the Hynñiewtrep Youth Council (HYC), Nongthliew Circle for erection of megaliths in memory of the heroes of Anglo Khasi resistance movement. The area is situated at an elevated location, which is prominent from all the surrounding villages. From the 16th to the 18th of December,2020, the members of HYC held a memorial megaliths erection ceremony, where the proposed statue of Tirot Sing Syiem will be sculpted at the centre of the complex. The six meter height statue will be one of its kind in the State that will stand majestically at twenty feet from the ground elevation. The megaliths were brought from Kyrphei village in Tyrsad and the erection ceremony culminated with the auspicious remembrance of the eightieth death anniversary of the Khasi bard Soso Tham. The megalith erection ceremony was initiated by the elder, Hoping Khyllait with prayers and incantation and graced by Mr Robert June Kharjahrin, President of
HYC central body. The chief guest in his address stated, ‘The megalithic complex will be the memorial monument in honour of all the known and unknown warriors of freedom struggle against the British imperial supremacy’. He said that each monolith will represents every warriors including Syiem Bormanik of Hima Shyllong or the erstwhile Shyllong province, Syiem Sngap Sing of Hima Maharam, Monbhut, Lorshon Jaraiñ, the courageous lady Phan Nonglait and all the other personalities of freedom struggle.
The function was presided by Daniel Star Pathaw, Assistant Secretary, HYC Nongthliew and the other dignitaries on the occasion are Mr Rhembor Saiborn, Vice-President HYC Central, headmen leader Mr Peter Anton Umwi and Mr Joplang Kharnaior, President, HYC, Nongthliew Circle. As part of the programme, the HYC President, Robert June Kharjahrin conducted an oath ceremony for the Women Wing of HYC, Nongthliew. The statue of Tirot Sing Syiem is being assigned to the artists of Riti Academy by the HYC and is slated to unveiled during his death anniversary on the 17th July, 2021, with the motive to also commemorate the Golden Jubilee of the statehood of Meghalaya.
n Art Exhibition of North East artists was held at Dhaka, Bangladesh, with the support of the Indian High Commission in Dhaka, and the Greater Sylhet Indigenous People’s Forum.
The Thoh Shun and Thwet Art camps have generated a platform for exposition of the art that originated from the region.

RITI Academy Celebrates 30th Anniversary

Middle F R Kharkongor Commissioner and secretary of Arts and Culture department inspect the sketch of the picture presented to him on the 30th anniversary of Riti Academy of Visual Arts held in the office at Jaiaw Langsning Shillong on 14-03-21.Pix by UB Photos

Commissioner and Secretary of Arts and Culture department, Federick Roy Kharkongor, on Sunday, lauded the contribution made by the founder of RITI Academy of Visual Arts (RAVA), Shillong, Raphael Warjri, towards the field of art and culture.
The RITI Academy of Visual Arts (RAVA), Shillong celebrated its 30th anniversary at Mad Gallery, Jaiaw Langsning, on Sunday.
Since its inception in 1991, Riti Academy of Visual Arts has traversed a long way in providing congenial space for the art fraternity to meaningfully work and realise its potential and vision.
Some of the significant highlights of the institute are: Thoh Shun International Art Camp, which was organised in 2005 with locals including few European and Asian artists. In 2007, the Thoh Shun Art Exhibition of North East artists was held at Dhaka, Bangladesh, with the support of the Indian High Commission in Dhaka, and the Greater Sylhet Indigenous People’s Forum.
The Thoh Shun and Thwet Art camps have generated a platform for exposition of the art that originated from the region.

Meghalaya State Awards Conferred

The Chief Minister, Mr Conrad K Sangma with the recipients of Meghalaya state award
Shri Satyapal Malik, Governor of Meghalaya conferred The Tirot Sing Syiem award for Arts and Literature to artist, playwright and writer, Raphael Warjri

मजदूर





 डॉ.मधुकर देशमुख

 भट्टियां तेरे कारखाने की जलाने में 
 मैं खुद जला हूँ।
 महल तेरे बनाने में
 मैं खुद जला हूँ।
 रोशन तुझे कराने में, 
 मैं खुद जला हूँ।
 चिराग तेरा जलाते- जलाते
 रखा मैंने खुद को अँधेरे में।
 देश को आत्मनिर्भर बनाने में
 हर जुल्म सहे मैंने।
 समाज की इन बंदिशों से 
 टूट कर चूर हो गया हूँ मैं…
 जीवन में संघर्ष करते- करते
 बिखर गया हूँ मैं।
 परिवार को खुश रखूँ, 
 पेटभर खाना खिलाऊँ
 ये सपना मैंने भी तो पाला था।
 तो क्या बुरा किया था. ..?
 पर नहीं बुझाई पेट की आग तुमने…!!
 समय अब आ गया है…
 हिम्मत न हारने का
 अब भी हिम्मत रखता हूँ
 जेठ के इस तपती धुप में
 परिवार का बोझ उठाने की।
 अब भी हिम्मत रखता हूँ
 जिस मिटटी में जन्म लिया
 उस मिटटी का कर्ज चुकाने की।
 अब भी हिम्मत रखता हूँ
 चलने की… 
 चलूंगा… चलता रहूँगा…
 अपनी मंजिल तक
 पर अब न रूकूंगा. ..
 पीछे मुड़कर न देखूंगा, 
 अब मैं चल पड़ा हूँ. ..
 अपनी मिटटी का कर्ज चुकाने. ..
 माँ-बाप की सेवा करने
 चलते - चलते अगर मिट भी गया
 तो समझूँगा; मेरे जैसा खुशनसीब और कोई नहीं…
 पर पीछे मुड़कर ना देखूंगा…!!
 बावजूद इसके
 अगर लौट सका तो…
 तेरा शहर बसाने अवश्य लौटूंगा 
 पर पीछे मुड़कर न देखूंगा…!! 

U Nongprat Lynti Ha Rilum Khasi U Swami Prabhananda

U Swami Lokeswarananda

KA JINGSDANG BARIT

Hadien ka jingiakren bad jingiapyni-lad la rai ba yn plie shuwa da ka skul miet na ka bynta kiba la tymmen bad la heh la san. Lada kane ka iaid shaphrang, yn sa plie sa ïa ka skul step na ka bynta ki khynnah rit. Ka long ruh kaba sngewtynnad ban kdew hangne, ba naduh ba sdang u Ketoki u la aiti ïa ka kam ha ki rangbah bad tymmen shnong ban rai ba ha kano ka rukom ka kam jong u ka dei ban long’ U la pynshai ruh ha ki ba kumba um shym la kwah jingsieW eiei na ki ïa kano kano ka kam kaba u trei, kim dei ruh ban khmih lynti ba un wan rah spah na shabar ri—kumba ka Balang Khristan ka la leh. U la batai ruh ha ki shaphang ki jingthmu ba ka Ramakrishna Mission ka la buh shuwa ban sdang ïa kano kano ka kam ha ino ino i jaka. U la kdew ba kan nym sdang ïa kano kano ka kam lymda ki trai shnong ki kwah lane iakynpham
lem ïa ka ha ka liang ka jingia aijing mut lang bad ka pisa tyngka. Ka ban sah jingkynmaW ka long ba ki Khasi jong ka shnong Shella wat la ki long kiba duk da kaba kyrmen ha la i jingioh barit jong ki na ka rep ka riang, ki la mynjur da kaba suk mynsiem ban iadon kti bad kit khlieh lang ha ka liang pisa tyngka katba ka hi ka dang neh. Hynrei kaba kham shon jingmut ka long ba haba ki shem ba u Ketoki hadien ka jingsah jong u bad u Mathuranath ar ne lai sngi, teng teng u la dei ban leit jingleit khlem bam khlemdih, téng teng ruh u bam katba lap katba shem. Kumta ki la tyrwa ïa u ka jaka shong jaka sah kaba kham thikna ha ing jong ki. Kim ju iawer ïa u ban iabam iadih ryngkat namar ba ki tharai ïa u kum kiwei pat ki Hindu kiba na rithor, ba un nym treh ban bam lang bad ki. Kumta ki la ai da u khaw, ki jhur bad kiwei kiwei ki jingdonkam ha kaba u Ketoki u la dei ban Shet ban tiew hi miet step. Ynda haba ki la shem ba um ju khein khyndiah ïa kano kano ka jingbam kaba la ai bad shet ma ki bad kum ban ong ba um ju niew-poh ne ibein ïa kano kano ka jaid ki la khot ïa u ban wan bam ja lang bad ki. U Ketoki ruh u la leit da kaba pdiang sngewbha ïa ka jingwer jong ki. Kane ka pyni ïa ka jingsdang jong ka jingiadei kum la uba ha ing ha sem kaba dap da ka ka jingieit, ka mon babha bad ka jingiashaniah iwei ïa iwei pat haduh kaba kut. Ka skul kaba u Ketoki u la plie ïa ka skul miet ka la roi shibun ha kaba u la hikai ktien Bangla ïa kito baroh kiba la heh la san. Ki ruh ki la nang ban kren katto katne kyntien khamtam eh ha ki iew ki hat bad kito ki Benga!i, ka khai pateng ruh ka ïa iaid bha hapdeng jong ki. Haba ka skul
ka la neh kumba katto katne bnai ki rangbah shnong ki la sngewdei ban plie sa ïa ka skul-step na ka bynta ki khynnah rit. Kumta la plie ïa ka kum ka jingpyrshang, ha kaba u Ketoki u la hikai. Tang hadien katto katne por. ka skul ka la roi shibun bad ka jingwan ki khynnah ka la nangbun nangbun kiba la wan ym tang ki khynnah Hindu hynrei wat ki khynnah khristan ruh namarba u Ketoki u la long u nonghikai batbit. U la dei ban trei shitom shibun namarba u la hikai artylli ki skul. Haba u lait por u la pyrshang ban pyntbit ialade ban nang ïa ka ktien jong ki bad ha kaba tip bad peit thuh ïa ki rukom im jong ki, ki riti-dustur, ki akor, ki rukom ngeit niam bad kiwei kiwei: de. U la rung man la ka thliew ing khlem da niew shiliang khmat iano iano, la ka dei Hindu ne Khristan, baduk ne bariewspah.


KA JINGTHMU KA KAM JONG U


U la pynshai ha ki baroh ba um shym la wan na ka bynta ka jingthmu ba shalyndet ne ban pynkylla Hindu ïa ki, la ha ka jingshisha ba lada uno uno uba long Hindu, u kwah ban tip shuh shuh ïa ka Niam Hindu u la kloi ruh ban iarap ïa u. Ka la pynsngewsih shibun ïa u ban ïohi ba ka jingkylla niam jong ki ka dei namar ki long kiba duk bad ba dangdum. Kaba kham ktah ïa u ka long haba u la ïohi ba kito kiba la kylla niam Khristan ki la sngew nongwei ïa la ka ri la jong. Hynrei un leh kumno tang ma u hi marwei pyrshah ïa kane? Kumjuh ruh, u sngew ba lada un pynkynduh jingmut ïa ki, kan long kum ban pynbor ha ka jingshaniah bad jingieit ïa u. Ki don kata ka jingsuba sniew ïa ki riewthor baroh kiba kwah ban pynkohnguh ïa ki ha ka jinglui lui bad jingngeit bieit jong ki. U la dei, namar kata ban pynsngewthuh shuwa ïa ki ba u long uba iapher jingthmu na kito baroh ki riewthor kiba ki la lap bad ïoh i. U la pynshisha ba um shym la wan ban khwan myntoi ialade shimet, hynrei ban iarap lem ïa ki. Dei kata kaba u kwah eh ban leh na ka bynta jong ki. Ha kawei pat ka liang u la sngewdonkam ban batai ha ki ïa ka jingthmu jong ka jingim jong u kum u Maharaj jong ka Ramakrishna Mission, u la khmih lynti ym da kaba khwan myntoi ialade namar kane kam ialam ïa u sha kata ka jingshisha ba kut tam kaba don ha ka jinglong niam.

KA JINGNANG ïA KA KTIEN KHASI


U Ketoki u la tip ba un nym lah ban iakren ïa kine ki kam baroh bad ki Khasi ne wat ban sngewthuh ïa ka jingmut jong ki, lymda u la lah ban kren bad nang bha
ïa ka ktien jong ki. Kumta u la pynleit ïa la ka jingmut jingpyrkhat baroh ha ka ban pyntbit ïa lade ha ka ktien Khasi. Ka jingkwah jong u kam shym la slem bad tang hapdeng lai bnai u la lah ban kren kum u Khasi hi bad ki briew baroh ki la ïa lyngngoh ïa ka jingnang jong u. Shen hadien, u la lah ban iakren iakhana tiak tiak ha ka ktien Khasi ha kino ki kam khamtam ha ka jingthmu kaba u don bad ki Khasi. Kito kiba la iakren bad iathuhkhana bad u ki la sakhi ïa ka jingnang jong u ïa ka ktien Khasi bad ïa ka rukom kren ïa ki kyntien khlem don jingbakla.


KA JINGMAHAM ÏA Kl KHASI

Da ka jingiakren iakhana jong u, um shym la kynshoit ïa ka jingpyrkhat jong ki ha kino kino ki rukom bakyrpang, Iait tang ban maham ïa ki pyrshah ïa ka jingduh noh jong ki ïa la ka hok kum ka jaidbynriew katba ki dang pyrshang ban ïoh ïa ka kabu babha, bad ki dei ruh ban ialeh dohim dohiap katba dang don ka por ha kane ka juk. Ha kawei ka liang u la kwah ïa ki ban nang iaid shaphrang da kaba bishar bniah bha ïa ki lynti badei ban iaid bad ban nym klet noh ïa la ki nongrim babha kiba ki la ïoh khamti naduh hyndai hynthai. U la kdew ruh ha ki ba kan long lehnohei ban im ne sahbieit marwei kumba ki la im mynshuwa. Ki dei ban tur shaphrang ban iashim bynta lang bad ki para-ri ban pyniphuh iphieng ïa la ka lawei jong ka ri. Barobor ki pynpaw ïa la ka jingartatien bad jingbymlah ban shaniah ïa la ka nusib ka ban sa jia lada kim pyrshang ban kiar na ka jingkulmar jong ka jingim ba la leit. U la batai ha ki ba ka
Jingirn kam shong ha kaba marwei, bad kam iah ruh ban jia wat ha kine ki juk kiba mynta, hynrei da kaba ianujor bad kaba bha la ka wan na kano kano ka phang, da kaba kyntait ïa ki jingshukor kiba pynthut ïa ka Jingbha ka ban sa jia.
Katba ki dang ïa shahshkor dngong ïa ki jingsneng jong u. Ki sngew kumba ki la ïoh shisha ïa ka jingim bathymmai wat la ki jingkren jong u kim da Shai bha. Ki la kohnguh ïa ki jingbthah jong u namarba ki sngewiadei ba ka long ka kam kaba khraw kaba u la shon Shap ha ka dohnud jong ki. Suki-pasuki ki la lah ban ithuh ïa u ba u long uba Pher jinglong na kito kiwei pat ki riewthor bad ki nongpyniaid ïa ka Balang Khristan, kiba la ialam ïa ki, khlem da kdew ïa kano kano ka lynti ba ki dei ban leh bad ban bat skhem ïa la ka jingshisha kum kawei na ki jaidbynriew babun.


(yn dang bteng…)

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