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लघुकथा

अकुलाहट

रश्मि ‘लहर’   |   ISSUE IX

 

"अरे ऋषभ! मेरी बीपी वाली दवा तो ले आओ, एक-आध दिन में ख़त्म हो जाएगी।"
कहते हुए दिनेश अपने नौकर ऋषभ के कमरे तक पहुॅंचा ही था कि फ़ोन पर ऋषभ को बात करता  सुनकर ठिठक गया । वह किसी से जोर से कह रहा था-
"का कहत हौ भैया? बाऊजी के आक्सीजन लगै की नौबत रही?" 
उसने मोबाइल को गौर से देखा तथा कान के और पास ले जाकर पूछा-
"उई छुटकऊ के साथ एम्बुलेंस मा हैं? उनका गाॅंव से निकले छह घंटा हुई गए? ऊई हड़ताल के चक्कर मा रस्ते मा फॅंसे हुइहैं? 
कहते-कहते ऋषभ की आवाज काॅंपने लगी! सिसकते हुए वो आगे बोला-
"छुटकऊ का फोनऊ बन्द बतावत है? हाय मोर बप्पा! उनका राम बचावै" कहते हुए ऋषभ चीख कर रो पड़ा!
और इधर दिनेश न्यूज़ रीडर की दूर से आती हुई आवाज सुनकर स्तब्ध रह गया कि-
 "ड्राइवरों की अचानक हुई हड़ताल के कारण पूरे देश में लगे भयंकर जाम के हटने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं!"
रश्मि 'लहर'
लखनऊ उत्तर प्रदेश


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रश्मि ‘लहर’