Ka Jingshai
RKMSHILLONG
Search:
Poesy - कवितायन

मुझे बोनसाई नहीं होना

Ka Jingshai-The Light   |   ISSUE VI

मुझे
उस रास्ते की तलाश है
जो बचा सके
संस्कारों की दरकती हुई
सीमा रेखा को
और जो याद दिलाए
लोगों को
क्षणभंगुर अस्तित्व की
मुझे अपनी जिंदगी से
बहुत उम्मीदें हैं
अपने मन की
अबोध शाखाओं में उगे
बड़े-बड़े सपनों को
सच होते देखना चाहता हूँ
मुझमें है उद्भट संघर्षशीलता
उन्मुक्त जिजीविषा
और हिलोरें मारता जुनून
पता नहीं जीवन क्रम
कहाँ टूट जाये
मैं अपने
हिमालयी अहसासों के साथ
देश व समाज के लिए
कांटों से खुद को बचाते हुए
मेहनत के खूब फूल
उगाना चाहता हूँ
सिरहाने पड़े ख्वाबों को
श्रम-मंत्र बनाकर
सफलता का स्वर्णिम
प्रकाश फैलाने के लिए
हमारे सपनों के
पेड़ों की टहनियाँं
छोटी होगी
तो बेवक्त सूख जायेगी
पतझड़ रचने लगेंगे षड्यंत्र
हमारा अपना होने का अर्थ
मिट जाएगा
क्योंकि सत्य सदा सत्य है
बौने सपने देखकर
मुझे बोनसाई नहीं होना!


author
Ka Jingshai-The Light