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लघुकथा

सैंडविच

डॉ अन्नपूर्णा बाजपेयी ‘आर्या’   |   ISSUE IX

 

"सुनो कुछ पैसे अकाउंट में ट्रांसफर कर दो भैया की बेटी शैली की सगाई है गिफ्ट ले जाना है उसके लिए !" लतिका ने किचेन से ही सोमेश से कहा।

"हम्मम!" सोमेश ने हुंकारी भरी।

इसी बीच पूजाघर से नंदा जी भी बोल पड़ीं, "बेटा आज मेरा अपॉइंटमेंट है डेंटिस्ट के यहां, आज वो दांत का सेट लगा देगा। बड़ी तकलीफ होती है खाना खाने में ! चल मैं तैयार होकर आती हूं। नब्बे हजार का खर्चा आएगा डॉक्टर बोला था। "

"नब्बे हजार!! मां मेरी तनख्वाह ही पचहत्तर हजार है। आपने इतने मंहगे दांत क्यों लगवाए। वो तो सस्ते वाले भी लग जाते!" वो झल्ला उठा।

"पापा ! फीस कब जमा करोगे , जब नाम कट जायेगा तब! एक हफ्ते से कॉलेज वाले आपको मैसेज भेज रहे हैं " बेटी ने भी जुमला उछाला।

उसने मैसेज बॉक्स चेक किया , "ओह!ये कैसे नहीं देखा!"

मन ही मन बुदबुदाया।

अपने अकाउंट का बैलेंस चेक किया और बेटी की फीस


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डॉ अन्नपूर्णा बाजपेयी ‘आर्या’