गुरू

१। उसकी महिमा सबसे न्यारी,
गोविन्द भी जायें बलिहारी,
शीश नवा कर ध्यान करूँ।
क्या सखि राधा ? ना गुरू।
२। खुद जलता जग रौशन करता,
ग्यान का दीपक उसमें जलता,
उसकी वाणी से सुबह शुरू।
क्या सखि पिता ? ना गुरू।
३। शंकाओं का समाधान दे,
सद्मार्ग का आत्मग्यान दे,
हाँथ जोड़ वंदन करूँ।
क्या सखि माता ? ना गुरू।

कृष्ण

१। जी करता नैनन में भर लूं,
बंद पलक फिर कभी न खोलूं,
मैं अपना दिल उस पर हारी।
ऐ सखि साजन ? ना गिरधारी।
२। वस्त्र छुपा देता वो मेरे,
पैरों पड़ती तब वो छोड़े,
बड़ा वो चंचल है चितचोर।
ऐ सखि साजन ? ना रणछोर।