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Poesy - कवितायन

गौतम बुद्ध पिता!

शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'   |   Autumn 2026

 

सत्तू खाकर

रहे जीतते

घर के युद्ध पिता!

 

खेतों में

पकड़े रहते थे

केवल हल की मूठ

खाते थे

जो भोग लगा था

ठाकुरजी का जूठ

सात्विक थी

हर सोच समय की

घी थे शुद्ध पिता!

 

पढ़ने की खातिर

भरते थे

सुबह-शाम वे जोश

बहुत तेज

चलते थे पैदल

जैसे हो खरगोश

कुछ भी हो

पर कभी न होते

मन से क्रुद्ध पिता!

 

झगड़ों की

हर पंचायत के

वे होते थे पंच

कभी नहीं

फटके करीब तक

राजनीति के मंच

गाँधी थे

गंभीर बहुत

थे गौतम बुद्ध पिता!


author
शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'

शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' (जन्म 1950, बलिया) वाराणसी के प्रतिष्ठित वरिष्ठ कवि व नवगीतकार हैं। ग्रामीण संस्कृति, लोक चेतना और सामाजिक सरोकारों से सजी आपकी रचनाएँ देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं।