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लघुकथा

राख की जाति

उमाकांत भारती Umakant Singh   |   Autumn 2026

      लावारिस शव का पोस्टमार्टम हो चुका था। अंतिम संस्कार के लिए उसे शहर के पुराने श्मशान घाट पर लाया गया।

    श्मशान के वृद्ध प्रहरी ने अर्थी के पास आकर पूछा," मृतक की जाति क्या है? "

    अर्थी के साथ आए लोगों ने एक-दूसरे का चेहरा देखा।

     "क्यों?" किसी ने पूछा।

    प्रहरी ने चार दीवारी से घिरे सामने फैले मैदान की ओर इशारा किया—

"श्मशान दो हिस्सों में बँटा है। दक्षिण वाला... और उत्तर वाला।"

वह आगे कुछ नहीं बोला।

   "दक्षिण में कौन," एक युवक ने पूछा।

   "ऊँची जाति वाले।"

   "और उत्तर में?"

   प्रहरी ने सहजता से कुछ जातियों के नाम गिना दिए। कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया।

"लेकिन यह तो लावारिस लाश है। इसकी पहचान तक नहीं हुई।"

    "फिर भी नियम तो नियम है," प्रहरी ने कहा।

    " यह नियम किसने बनाया है? "

     प्रहरी ने शांत स्वर में जवाब दिया, "आजादी के बहुत पहले से...।"

 "इतना पता है कि यह हिंदू का शव लगता है। अब बताइए, इसे उत्तर ले जाएँ या दक्षिण?" प्रहरी पहली बार असमंजस में पड़ा।

    फिर अर्थी के साथ आए एक आदमी ने श्मशान की ओर देखा और धीमे से पूछा, "अच्छा, यह बताइए बाबा... यहाँ जलने के बाद राख कहाँ रखी जाती है—उत्तर में या दक्षिण में ? क्या तेज हवा एक-दूसरे राख को नहीं मिलती?"

    बूढ़े प्रहरी के पास -कोई जवाब नहीं था। उस दिन श्मशान में पहली बार उत्तर और दक्षिण के बीच चिता जली थी।

आँख का तारा 
 डॉ मीना कुमारी परिहार 'मान्या'
     

      जुम्मन चाचा गाँव के लोगों की सेवा में लगे रहते थे। जुम्मन चाचा को गाँव में कौन नहीं जानता था। घर में किसी के यहाँ झगड़ा हो जाए तो सुलझाना, कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल ले जाना, लड़कियों को स्कूल पहुँचाना,

ऐसे कार्यों को चुटकी में हँसते-हँसते कर जाते थे। गाँव के  बरगद पेड़ के नीचे उनकी खटिया लगी रहती थी।

गाँव के बच्चे उनसे कहानी सुनने आते थे। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई की बातें समझाना, नैतिकता का पाठ पढ़ाना। पंचायत का मुखिया भी इन्हें काफी तवज्जो देता था। कोई भी फैसला लेना हो तो जुम्मन चाचा को आमंत्रित करता था। जुम्मन चाचा सबके चहेते बन गए थे। उनके बच्चे जब अमेरिका से मिलने आए तो उनकी खुशी का ठिकाना न था।

"बाबूजी! हम लोग यूँ ही बिना समझे आपको हर वक्त कुछ न कुछ कह दिया करते थे कि क्यों आप दिन भर बच्चों के बीच रहते हैं और सारा काम छोड़कर क्यों गाँव के लोगों के लिए मेहनत करते हैं, कभी तो आराम कर लिया कीजिए।"

"आज क्या कहना चाहते हो मेरे बच्चों!"

"यही कि आज आपका जीवन सार्थक हुआ।  हम ही ग़लत थे।  समझ न सके आपकी सेवा-भावना को।आप सभी के आप सभी के आंख के तारे बन गए हैं। सभी के ज़ुबां पर है जुम्मन चाचा !जुम्मन चाचा!"


author
उमाकांत भारती Umakant Singh

उमाकांत भारती हिंदी साहित्य के एक सुप्रसिद्ध लेखक, समीक्षक और प्रबुद्ध चिंतक हैं, जो अपनी वैचारिक और गंभीर लेखन शैली के लिए जाने जाते हैं।