गांव की धूल भरी सड़क पर सायकिल चलती लड़की
नहीं देखी है मुड़कर पीछे
सड़क के दोनों ओर खेतों में बिछी है पीली सरसों
सरसों के फूलों पर मंडरा रही हैं तितलियां
पीली ओढ़नी सी बिछी सरसों- के ऊपर मंडराती तितलियां... आकर्षित करती हैं लड़की को लड़की अपने मन को बाँध... तन को साधती - देख रही है -
...अपने लक्ष्य की ओर
कभी इन्हीं धूल भरी राहों में खो गई थीं
कितनी ही लड़कियां ...
मां की मांओं की सखियां - बालपन में ब्याही गई
घूंघट में लिपटी लजीली- गठरियाँ
लोगों ने नाम दिया था सुंदर- तितलियां
नुचे पंख खो गईं लड़कियां - अनाम गांव के किसी आंगन में
सायकिल चलाती लड़की सजग है अपने प्रति
तितली और फूल के समीकरण से दूर
अंतरिक्ष के खगोलीय नक्षत्र के - सवालों को हल कर रही है- लड़की
पृथ्वी और आकाश को एक साथ साध रही है लड़की।